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आईएमए पीओपी 2021 : बतौर रिव्यूइंग अफसर राष्ट्रपति कोविंद लेंगे परेड की सलामी

देहरादून। आगामी 11 दिसंबर को इंडियन मिलिट्री एकेडमी में आयोजन होने वाली पासिंग आउट परेड में बतौर रिव्यूइंग अफसर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सालमी ले सकते हैं। हालांकि अभी इस पर अभी कोई आधिकारिक शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। लेकिन राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आईएमए…

Khabri Bhula Avatar

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देहरादून। आगामी 11 दिसंबर को इंडियन मिलिट्री एकेडमी में आयोजन होने वाली पासिंग आउट परेड में बतौर रिव्यूइंग अफसर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सालमी ले सकते हैं। हालांकि अभी इस पर अभी कोई आधिकारिक शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। लेकिन राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आईएमए प्रशासन के अनुसार, पीओपी की तैयारियां शुरू कर दी हैं। परेड का आयोजन कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार पीओपी में जेंटलमैन कैडेट के कांधो पर उनके स्वजन पीप्स सजा पाएंगे। पिछली बार परिजनों के शामिल न होने से सैन्य अफसरों और उनके परिजनों ने जेंटलमैन कैडेट्स के कंधों पर पीप्स, सितारे सजाए थे। आईएमए की जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल हिमानी पंत ने बताया कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत पूर्व में पीओपी का दायरा सीमित किया गया था । इस बार जेंटलमैन कैडेट के स्वजन भी परेड में शामिल हो सकेंगे। परेड का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।
पासिंग आउट परेड  से पहले तीन दिसंबर को ग्रेजुएशन सेरेमनी, आठ दिसंबर को कमांडेंट अवॉर्ड सेरेमनी, 09 दिसंबर को कमांडेंट परेड, 10 दिसंबर को मल्टी एक्टिविटी डिस्प्ले व साउंड व लाइट शो का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 11 दिसंबर को मुख्य परेड का आयोजन किया जाएगा। जिसमें 319 भारतीय और 68 विदेशी कुल 387 जेंटलमैन कैडेट परेड में कदमताल करते दिखेंगे। मुख्य पीओपी से पहले जेंटलमैन कैडेट हर दिन पूर्वाभ्यास में पसीना बहा रहे हैं।
बता दें अपने 89 सालों में भारतीय सैन्य अकादमी ने न सिर्फ भारत बल्कि मित्र देशों को भी कुल 63 हजार 381 युवा अफसर दिए हैं। इनमें 34 मित्र देश के 2656 विदेशी कैडेट भी शामिल हैं। एक अक्टूबर 1932 में मात्र चालीस जैंटलमैन कैडेट के साथ शुरू हुआ यह सफर वर्तमान में 1650 कैडेट तक पहुंच गया है। भारतीय सैन्य अकादमी से पहला बैच 1934 में पास आउट हुआ था। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक रहे फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ इसी पहले बैच के छात्र थे। 

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